Wednesday, July 24, 2019

शंकराचार्य मठ में श्रावण मास के प्रवचन

माता-पिता गुरु की आज्ञा नहीं मानना भी पाप
- शंकराचार्य मठ में चल रहे श्रावण मास के अनुष्ठान में मठ प्रभारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के प्रवचन

इंदौर। भगवान राम जैसे पितृ प्रेम, भातृ प्रेम, एक पत्नी व्रत करने वाला ही भगवान को प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति के पूर्व जन्मों का पाप मन में बने रहने के कारण इस जन्म में व्यक्ति मनुष्य जन्म में ज्ञान प्राप्त करके, भगवान की भक्ति करके प्रारब्ध की प्राप्ति के लिए है। व्यक्ति माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार बताता है, परंतु उनकी सेवा नहीं करता। माता-पिता गुरु की आज्ञा नहीं मानना भी पाप है।
पीथमपुर बायपास रोड, नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ में चल रहे श्रावण मास के प्रवचन के तहत मठ प्रभारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने बुधवार को यह बात कही। महाराजश्री ने कहा कि आज के दौर में व्यक्ति गुरु से आशीर्वाद लेने के लिए खड़ा रहता है परंतु राम की तरह गुरु की आज्ञा मानकर कार्य नहीं करता। पत्नी की आज्ञा अवश्य मानता है। रामजी गुरु से कुछ भी नहीं छुपाते थे, न ही उनकी आज्ञा के बिना कोई कार्य करते थे। इसी कारण उन्हें तपोबल और रावण को मारने की शक्ति प्राप्त हुई।

Tuesday, July 23, 2019

शंकराचार्य मठ, इंदौर में श्रावण मास के प्रवचन

रामजी जैसे सिर्फ रामजी हैं कोई और नहीं
-शंकराचार्य मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के श्रावण मास के प्रवचन

इंदौर।
संसार में रामजी जैसा महापुरुष कोई हुआ नहीं और भविष्य में होगा भी नहीं। वाल्मीकि ऋषि रामजी की कथा लिखने लगे तब उनके मन में विचार आया कि मैं रामजी की उपमा किससे करूं। उन्होंने इधर-उधर बहुत मन दौड़ाया, लेकिन उनकी सम­ा में नहीं आया। अंत में उन्होंने कहा, कि रामजी, रामजी जैसे ही हैं, जिस प्रकार समुद्र समुद्र जैसा ही है। उसकी उपमा किसी से नहीं की जा सकती। रामजी के विशाल गुणों को वर्णन कोई नहीं कर सकता। रामजी के गुण अनंत हैं। मनुष्य की बुद्धि अल्प है। भगवान शिव भी रामजी के गुणों के बारे में पार्वतीजी से कहते हैं- ‘राम अतर्क बुद्धि मन वानी, मत हमार अस सुनहु भवानी।’ जगत में जितने दिव्य गुण हैं वे सब रामजी में हैं।
यह बात पीथमपुर बायपास रोड, नैनोद स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने श्रावण मास के नित्य प्रवचन में शनिवार को कही। महाराजश्री ने कहा कि पुरुष का जीवन रामजी की तरह ही होना चाहिए। रामजी ने जगत को पुरुष धर्म सम­ााया है और सीताजी ने स्त्री धर्म। जगत को धर्म का आदर्श बताने के लिए ही सीता-रामजी प्रकट हुए हैं। स्त्री धर्म अति सर्वश्रेष्ठ है। स्त्री स्वधर्म का बराबर पालन करे तो उसे घर में ही मुक्ति मिलती है। स्त्री को घर छोड़कर बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं। स्त्री यदि बाहर भटके तो स्वैच्छाचारिणी बनती है और उसका पतन हो जाता है। जो स्त्री घर में रहकर गृहिणी धर्म संभालती है, उसके पवित्र रहने की अनुकूलता रहती है।
स्त्री को जल्दी होती है प्रभु की प्राप्ति
डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने बताया शास्त्र में लिखा है, कि स्त्री को प्रभु की प्राप्ति जल्दी होती है, इसलिए स्त्री का हृदय स्नेहयुक्त और आर्द्र होता है। उसमें समर्पण की भावना होती
प्रतिदिन अभिषेक और प्रवचन
इसके साथ ही मठ पर प्रतिदिन पूरे श्रावण मास में दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक नित्य अभिषेक किया जा रहा है। प्रति सोमवार सुबह 10 से 12 बजे तक अर्चन किया जाएगा। सुबह 8 से 10 बजे तक मास परायण किया जा रहा है और रात 8 से 9 बजे तक डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के प्रवचन हो रहे हैं।
है। घर के प्रत्येक जीव में ईश्वर की भावना रखते हुए, तन-मन से सबकी सेवा करे और घर का काम करते-करते परमात्मा का स्मरण करे तो बड़े-बड़े संन्यासी को जो फल प्राप्त नहीं होता वह घर में रहकर स्त्रियों की घर में ही प्राप्त हो जाता है।

शंकराचार्य मठ, इंदौर में श्रावण मास के प्रवचन

सभी वेदों का सार है राम नाम
 -शंकराचार्य मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के श्रावण मास के प्रवचन 


इंदौर। भगवान शंकर रामायण के प्रधान आचार्य हैं। सौ करोड़ श्लोकों में शिवजी ने रामचरित का वर्णन किया है। शत कोटि प्रविष्टरम्... रामायण के सौ करोड़ श्लोक हैं, जिनका संक्षेपण कोई भी नहीं कर सकता है। राम कथा सागर के समान है। हरि अंत हरि कथा अनंता... शिवजी ने कहा है मैं श्रीराम की कथा करता हूं, सतत राम नाम जपता रहता हूं, परंतु श्रीराम कैसे हैं यह मैं भी नहीं जानता। यह शिवजी की सरलता है जो ऐसा कहते हैं, कि हम कुछ जानते नहीं। वे हमें संदेश देते हैं कि इस भावना के साथ जो जाप करता है कि हम कुछ जानते नहीं, उसे ही ईश्वर की प्राप्ति होती है। ओंकार में जो शक्ति है, वही राम नाम में है। राम नाम सभी वेदों का सार है।

यह बात पीथमपुर बायपास रोड, नैनोद स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने श्रावण मास के नित्य प्रवचन में रविवार को कही। चौबीसों घंटे खुला रहता है शिव का दरबार महाराजश्री ने बताया शिवजी इतने सरल हैं कि उनका दरबार चौबीसों घंटे खुला रहता है। वहां पर आपस में शत्रुभाव रखने वाले जीव भी एक साथ बैठते हैं। गणेशजी का वाहन चूहा है, लेकिन शंकरजी के गले में नाग लिपटा रहता है। शंकरजी का वाहन नंदी है, वहीं भगवती का वाहन सिंह है, पर शंकरजी के दरबार में वे अपना बैर भूल जाते हैं। राम दरबार में जाओगे तो हनुमानजी पूछेंगे कि क्या तुम रामजी के मर्यादा का पालन करते हो, यदि नहीं करते तो तुम नहीं जा सकते। श्रीकृष्ण के दरबार में जाओगे तो गोपी बनकर जाना होगा। शंकरजी के दरबार में कैसे भी जा सकते हैं।
 शिवजी सारे श्लोक बांट दिए पर राम नाम अपने पास रखा 

डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने बताया राक्षस और मनुष्य दोनों की रामायण का पाठ करते हैं। भगवान शंकर के दरबार में देवता, ऋषि रामायण मांगने आए, वहां राक्षस भी आए सभी ने शंकरजी से रामायण मांगी, राक्षस भी रामायण का पाठ करते हैं, लेकिन आज के मनुष्य रामायण की गरिमा को नहीं सम­ाते हैं। रामायण पाठ करने से सारा पाप भस्म हो जाता है। राम नाम की शक्ति से शिवजी हजम कर लिया था विष महाराजश्री ने बताया राक्षसों, ऋषियों सभी को राम अच्छे लगते हैं। जब तीनों की बहुत ज्यादा मांग हो गई तो शंकरजी ने सौ करोड़ श्लोकों के तीन भाग कर दिए। 33 करोड़, 33 लाख, 33 हजार 333 कुल 99 करोड़, 99 लाख, 99 हजार, 999 श्लोक वितरित हुए। उन सौ करोड़ में से एक श्लोक बाकी रहा, इस श्लोक को भी शंकरजी ने तीन भागों में बांटा, तो दो अक्षर बचे राम। शंकरजी ने कहा यह तो मैं रखूंगा और इसी राम नाम से विष तो हजम कर गए।

शंकराचार्य मठ, इंदौर

अयोध्या कांड का पाठ करेंगे तो घर अयोध्या बन जाएगा
-शंकराचार्य मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के श्रावण मास के प्रवचन

इंदौर। 22  जुलाई 2019
मन ईश्वर में लगा हो और जीव ईश्वर का स्मरण करते हुए शरीर त्याग करे तो उसे मुक्ति मिलती है। जिस घर में ­ागड़ा होता हो तो वे अयोध्या कांड का पाठ करें, ­ागड़े बंद हो जाएंगे, क्योंकि अयोध्या कांड में कोई युद्ध नहीं है। घर अयोध्या बन जाएगा और भगवान राम वहां पर निवास करेंगे। संपूर्ण जीवन श्रीराम स्मरण में हो गया हो तो अंत काल में श्रीराम याद आएंगे। भगवान का जाप सदा करते रहो, जब तक कोई पूर्ण आहूति न हो। जब तक शरीर है तब तक भगवान का भजन करते रहो।
यह बात पीथमपुर बायपास रोड, नैनोद स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने श्रावण मास के नित्य प्रवचन में रविवार को कही।
तीन महान ग्रंथों का एक ही आदर्श संयुक्त परिवार
डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने बताया हमारे भारत देश में संयुक्त परिवार की प्राचीन प्रथा अब भुलाई जा रही है। अपने तीन महान ग्रंथों का आदर्श संयुक्त कुटुंब की प्रथा है। श्रीकृष्ण बलराम दो भाई थे, पर एक ही घर में थे। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न चार भाई थे, पर एक ही घर में थे। पांडव पांच भाई थे पर एक ही घर में थे। भागवत, रामायण और महाभारत तीन ग्रंथों का आदर्श एक ही है, संयुक्त कुटुंब। आजकल तो ऐेसी शिक्षा मिल रही है कि शादी होते ही भाई, भाई से अलग हो जाता है। केवल पैसा कमाने की शिक्षा ने आपसी प्रेम, संयुक्त परिवार, बड़ों की मान मर्यादा सब तोड़कर रख दी है। परिणाम यह हो रहा है कि अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित कर लोग देश, समाज और कुटुंब को खंड-खंड करने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो अखंड भारत का स्वप्न मृतप्राय हो जाएगा।
बिल्वपत्र से शिवजी का सहस्राधिक अर्चन
मठ पर श्रावण मास के तहत सुबह 10 से 11बजे तक रामचरित मानस का मास परायण पाठ। इसके पहले श्रावण सोमवार पर सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक सोडषोपचार के साथ बिल्वपत्र से शिवजी का सहस्राधिक अर्चन, दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक रुद्राभिषेक और प्रतिदिन रात 8 बजे से डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के मास परायण पर आधारित व्याख्यान हो रहे हैं।

Saturday, December 14, 2013



फूट डालो, राज करो की नीति पर चल रहे राजनीतिक दल


पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदजी महाराज से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू


शंकराचार्य उवाच

-शासन तंत्र ने अपने मतलब के लिए खड़े किए कई फर्जी संत
-नकली संत हवाई जहाज में और मेरे जैसे शंकराचार्य रेल में धक्के खाते हैं
-हमें मरने का भय नहीं, न ही हम खरीदे जा सकते हैं
-गंगा को दूषित किया, इसीलिए आया उत्तराखंड में प्रकोप

Shailendra Joshi

इंदौर। शासन तंत्र ने अपने कई दलालों को शंकराचार्य और संत के रूप में स्थापित कर दिया, लेकिन नकली संतों की पोल खुलकर ही रहती है। अपने मतलब के लिए राजनीतिक दलों के द्वारा इन फर्जी संतों का दुरुपयोग किया जाता है, लेकिन असली कभी इनके चक्कर में नहीं पड़ते। 22 वर्षों से शंकराचार्य हूं लेकिन शासन तंत्र ने मुझे जितने कष्ट दिए, कह नहीं सकता। ईमानदारी से चलने में यातनाएं बहुत हैं।
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदजी महाराज ने बुधवार (12-12-2013) को विशेष मुलाकात में यह बात कही। वे दशहरा मैदान में आयोजित यज्ञ में शामिल होने के लिए अहिल्या की नगरी में पधारे हैं। शंकराचार्यजी ने कहा शासन तंत्र द्वारा बनाए गए संत सत्ता के अनुकूल रहे तो उन्हें स्थापित कर दिया जाता है और विरोध किया तो गिराने में भी देर नहीं लगती। हम जैसे शंकराचार्य किसी राजनीतिक दल के मोहताज नहीं हैं, इसीलिए सत्ता में बैठे लोग हमसे डरते हैं और इसीलिए हमें उपेक्षा भी सहनी पड़ती है लेकिन हम अपनी परंपरा  और सिद्धांत नहीं छोड़ सकते। हमें न तो मरने का भय है न ही हम खरीदे जा सकते हैं।
दलाई लामा क्यों?
शंकराचार्यजी ने कहा भारत के राष्ट्रीय आयोजनों में धर्म प्रमुख के रूप में दलाई लामा को बुलाना या फिर पोप की महत्व देना अजीब लगता है। कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा कोई भी दल हो, ये सभी एक  जैसे हैं। भारतीय संस्कृति में सनातन धर्म सर्वोच्च है और आद्य शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों मठों के शंकराचार्य इस देश में होते हुए भी बुलाया जाता है लामा को। यह नेताओं की राजनीतिक स्वार्थपरक सोच का ही परिणाम है।
छलक पड़े थे विश्व बैंक अधिकारी के आंसू
महाराजश्री ने बताया 5 मई 1999 को विश्व बैंक की एक महिला अधिकारी मुझसे दिल्ली में मिली थीं। उन्होंने विश्व की आर्थिक समस्याओं पर मार्गदर्शन मांगा। इस पर मैंने उन्हें सिर्फ सात-आठ मिनट में जो सुझाव दिए, जिन्हें सुनने के बाद उनकी आंखों से आंसू निकल आए। उस महिला अधिकारी से मैंने पूछा कि आप रो क्यों रही हैं। तो उन्होंने कहा मुझे भारत सरकार की समझ पर रोना आता है। यहां से संयुक्त राष्ट्र को एक बड़ा समाधान मिल रहा है लेकिन क्या भारत सरकार ऐसा नहीं कर सकती?
राजनीतिक दल अंगे्रजों की राह पर 
हमारे देश के सभी राजनीतिक दल अंगे्रजों की फूट डालो राज करो सहित इसी तरह की कई कूटनीतियों पर चल कर शासन करना चाहते हैं।
सरकार ने रुकवाया था मेरा बयान
अयोध्या का मामला जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ की अदालत को सौंपा था, तब मैंने पटियाला में रात 11 बजे बयान जारी किया था लेकिन कुछ लोगों ने मेरा बयान तत्काल सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंचा दिया। इसके बाद शासन ने कलेक्टर को मेरा बयान रुकवाने के निर्देश दिए और मेरा बयान कहीं पढ़ने या देखने को नहीं मिला।
यह सही संतों का संक्रमण काल
यह संतों का संक्रमण काल चल रहा है। हिंदू संस्थाओं पर झूठे केस लगाए जा रहे हैं और वास्तविक संतों को कई तरह के कांडों में फंसाया जा रहा है।
शंकराचार्यों में कोई बैर नहीं
चारों मठों के शंकराचार्य एक मंच पर दिखाई नहीं देने के सवाल पर स्वामी निश्चलानंदजी महाराज ने कहा लगातार भ्रमण के कारण हम लोग कम भले ही मिल पाते हैं, लेकिन संचार तंत्र के माध्यम से हम विचारों का आदान-प्रदान तो करते ही हैं। सभी शंकराचार्यों के सिद्धांत तो समान ही हैं। अयोध्या ढांचा ध्वस्त होने के बाद मैं शृंगेरी के शंकराचार्य से मिलने गया, बाद में वे भी हमारे मठ में आए। ज्योतिष मठ के स्वरूपानंदजी से भी संवाद होता है। हम सभी शंकराचार्य सनातन धर्म और समाज सुधार का काम कर रहे हैं, आपस में दुश्मन थोड़े ही हैं।
मठों पर हो रहे कब्जे
पुरी का मठ कभी 400 एकड़ में था लेकिन अवैध कब्जों के चलते अब सिर्फ चार एकड़ का रह गया है। इसी तरह 100 एकड़ के बाग पर भी कब्जे हो गए हैं। हमें दबाने की शासन तंत्र की यह भी एक साजिश है।
धर्म दंड में आवाज नहीं होती
शंकराचार्यजी ने कहा मोक्षदायिनी गंगा पर अतिक्रमण, गंदगी डालने और उसे नष्ट करने के प्रयास का ही नतीजा है कि उसके प्रकोप से हजारों लोग मारे गए। गंगा ने इस तरह अपना तट भी साफ कर लिया। कुछ दिन पहले ही मैंने गंगा संरक्षण अभियान के तहत सरकार को चेताया था, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। जन-धन के साथ ही 50 से ज्यादा सरकारी प्रोजेक्ट तबाह हो गए। वास्तव में हम जो धर्म दंड धारण करते हैं उसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। हम दंड का नित्य पूजन करते हैं। यदि कोई धर्माचरण के विरुद्ध काम करता है तो यह दंड सक्रिय हो जाता है लेकिन इसकी मार में आवाज नहीं होती।

Thursday, March 28, 2013

shankaracharya

सरस्वती के मंदिर में नमाज क्यों?

 शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी सरस्वती से विशेष मुलाकात 
जगदगुरु उवाच -सफलता के लिए दंड नहीं धार्मिक भावना जरूरी
 -धर्म का आश्रय लो, पशु बनना छोड़ दो 
-सत्ता पर धर्म का नियंत्रण जरूरी होता है





 शैलेंद्र जोशी (deputy news editor, dainik dabang duniya, indore-mp)
इंदौर। (25-3-13) गुलामी के वक्त हमारे देवस्थानों पर कब्रस्तान बना दिए गए। ऐसा ही प्रयास भोजशाला में हुआ। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन जब मुस्लिम भाई निराकार परमात्मा की आराधना करते हैं और मूर्ति पूजा उनके धर्म के विरुद्ध है तो फिर सरस्वती के मूर्ति स्थल पर नमाज पढऩे क्यों जाते हैं? वास्तव में देश में जितने भी धर्मात्मा राजा हुए हैं, उनमें प्रमुख थे राजा भोज, उन्होंने धार की भोजशाला में देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित की थी। यहां की संस्कृति का बड़ा सम्मान था और राजा सरस्वती की आराधना करते थे। उनके राज्य में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं था जो संस्कृत नहीं जानता था। कवि कालिदास उनके सभासद थे। क्या हम इस विरासत को भूल जाएं?
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह बात सोमवार को दैनिक दबंग दुनिया से खास मुलाकात में कही। वे द्वारका स्थित शारदा और बद्रिकाश्रम स्थित ज्योतिष मठ के पीठाधीश्वर हैं। उनका रविवार को नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ में आगमन हुआ। वे होली यहीं मनाएंगे।
 संत किसी पार्टी का नहीं होता 
शंकराचार्यजी ने कहा कि भोजशाला का संकट सरकारों का ही खड़ा किया हुआ है। पहले उमा भारती ने वहां सरस्वती पूजन के लिए सत्याग्रह किया था लेकिन उस वक्त जो पार्टी सत्ता में थी, क्या उसे धर्म विरोधी माना जाए? उन्होंने कहा संतों की एक परंपरा होती है। हमारे यहां परंपरा में राज धर्म का भी महत्व है। संत किसी पार्टी का नहीं होता लेकिन यदि कुछ गलत हो रहा है तो उसका विरोध कर व्यवस्था दुरुस्त करने में उसे अहम भूमिका निभानी ही चाहिए।
मैं कांग्रेसी कैसे?
 इस सवाल पर कि आप पर हमेशा कांग्रेसी आचार्य होने का आरोप लगता रहा है, शंकराचार्यजी ने कहा कि मैं किसी कांग्रेसी के घर नहीं जाता, हम तो संत हैं, यदि वे मार्गदर्शन-दर्शन के लिए आते हैं तो हम उन्हें रोक नहीं सकते। हम सबके लिए हैं, तभी तो हमें जगद् गुरु कहा जाता है।
क्या गंगा में गंदगी बहने दें? 
स्वामीजी ने कहा गंगा में कारखानों का केमिकल और ड्रेनेज की गंदगी बहाई जा रही है। उत्तराखंड में ही गंगा पर 70 से जयादा बांध बनाए गए हैं। इस पर यदि संत गंगा को निर्मल रखने के लिए कहता है तो क्या वह राजनीतिक है? अनाज में यूरिया और अन्य केमिकल के तत्व आ रहे हैं। कीटनाशकों की बदौलत उसके कीड़े अत्यधिक जहरीले हो गए हैं। क्या संत इसका विरोध नहीं कर सकते?
क्या वे हमें गाइड करेंगे?
स्वरूपानंदजी ने कहा कि आद्य शंकराचार्य 2500 साल पहले हुए थे और तब से हमारी परंपरा चल रही है। डॉ. हेडगेवार, गोलवलकर, सुदर्शन आदि 125 साल से ज्यादा के नहीं हैं। हम उन्हें गाइड करेंगे या वे हमें गाइड करेंगे?
युवाओं को दें संस्कारों की शिक्षा
देश में बढ़ते दुष्कृत्यों की घटना पर शंकराचार्यजी ने कहा यह कृत्य युवाओं ने ही किए हैं और वे ही विरोध के लिए भी खड़े दिखाई देते हैं। वास्तव में युवाओं में संस्कारों की शिक्षा की खास जरूरत है। उन्हें यह समझाना होगा कि जैसा व्यवहार आप अपनी बहन-बेटी के लिए चाहते हैं वैसा ही व्यवहार आप दूसरों के साथ भी करें। संत को उसके आचरण से परखो 
जगद् गुरु ने माना कि यह सच है कि देश में कई नकली शंकराचार्य और संत घूम रहे हैं, लेकिन लोग जानते हैं कि कौन असली है और कौन नकली। संत की पहचान उसके आचरण से ही हो जाती है। आजकल के संत ढाबे पर खा रहे हैं।

Monday, March 25, 2013





शंकराचार्य मठ इंदौर में जगद् गुरु स्वामी स्वरूपानंदजी सरस्वती पधारे
-भक्तों में जबरदस्त उत्साह

द्वारका-शारदा और बद्रीकाश्रम-ज्योतिष मठ के पीठाधीश्वर अनंत विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी सरस्वती रविवार को इंदौर स्थित शंकराचार्य मठ (नैनोद, बिजासन के पास, पीथमपुर बायपास रोड) पधारे। जहां उनके आशीष लेने और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मठ के प्रभारी गिरीशानंदजी महाराज ने बताया शंकराचार्यजी द्वारा मठ में ही होली मनाने की घोषणा पर भक्त समुदाय में जबरदस्त उत्साह है। साथ में शंकराचार्यजी के सचिव सुबुद्धानंदजी महाराज और संत
मंडली पधारी है।

Sunday, March 24, 2013

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी सरस्वती का इंदौर आगमन

(फोटो सहित)
इंदौर। द्वारका स्थित शारदा और बद्रीकाश्रम के ज्योतिष मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का रविवार (24-3-13) शाम करीब 7 बजे आगमन हुआ। वे पीथमपुर बायपास रोड स्थित शंकराचार्य मठ में पधारे, जहां उनका भक्त मंडल के सदस्यों, नैनोद, दिलीप नगर और आसपास के ग्रामीणों ने स्वागत किया। मठ के प्रभारी गिरीशानंदजी महाराज ने बताया कि शंकराचार्यजी के साथ सचिव सुबुद्धानंदजी महाराज सहित कई संत पधारे हैं। शंकराचार्य करीब छह वर्ष बाद इंदौर पधारे हैं। पहले वे शंकराचार्य मठ के भूमिपूजन के लिए पधारे थे। स्वामीजी यहीं होली मनाएंगे।

Tuesday, February 19, 2013

मां नर्मदा का सहस्र दीपार्चन कर ओढ़ाई चुनरी
नर्मदा जयंती (17-2-13) पर शंकराचार्य भक्त मंडल के सदस्य मठ प्रभारी गिरीशानंदजी के सान्निध्य में महेश्वर पहुंचे और मां नर्मदा का दीपार्चन कर चुनरी ओढ़ाई गई। पीठ पंडित संजय शास्त्री और पं. राजेश शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राजोपचार पूजा व रुद्राभिषेक कराया।  इस दौरान सभी आद्य शंकराचार्य रचित नर्मदाष्टक का सस्वर पाठ किया। भक्त मंडल के संतोष पटेल, यौवन पटेल, राकेश बड़ोदिया, दिनेश मौर्य, बाबूलाल राठौर, जितेंद्र बिजोरिया, जीतू ठाकुर और प्रतिपालसिंह टुटेजा ने इस अनुष्ठान में विशेष रूप से हिस्सा लिया।

shankaracharya

15-2-13
शंकराचार्य, प्रशासन और नेताओं का महानाट्य
आए शंकराचार्य के लिए, साथ थे प्रशासन के

शैलेंद्र जोशी
इंदौर। भोजशाला में वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन के लिए धार जाने के लिए इंदौर पहुंचे काशी तथाकथित सुमेरू पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद महाराज को प्रशासन उलझाता रहा वहीं उनके शंकराचार्य होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वे धार जाने के लिए आए थे लेकिन गुरुवार को सुबह से देर रात तक धार जाने की बजाय वे महाकालेश्वर और नेताओं के घर घूमते रहे। वे इंदौर आते ही प्रशासन के अफसरों के जाल में फंसते रहे। रातभर उन्हें बिजासन टेकरी के पास नवग्रह जिनालय परिसर स्थित फार्म हाउस में प्रशासन ने पुलिस के घेरे में नजरबंद रखा। वे रात एक बजे धार के लिए रवाना होने वाले थे लेकिन सुबह करीब छह बजे तक सोते रहे।
इसके बाद जागे। पुलिस ने उन्हेंं पहले तो उनकी ही गाड़ी में बैठने से मना कर दिया था। सुबह करीब 7.15 बजे मंत्री महेंद्र हार्डिया, भाजपा नगर अध्यक्ष शंकर लालवानी और विधायक सुदर्शन गुप्ता पहुंचे। कहने को तो शंकराचार्यजी की सेवा में थे लेकिन हकीकत यह थी कि वे प्रशासन के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। इस बीच पुलिस ने मीडिया को भी रोक दिया। जो मकान के अंदर थे वे अंदर ही रोक लिए गए और जो बाहर थे उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया। जब नरेंद्रानंदजी फार्म हाउस से बाहर आए और धार जाने के लिए गाड़ी बुलाने लगे तो एसडीएम शरद श्रोत्रिय, सीएसपी रूपेश द्विवेदी और अन्य अधिकारियों ने उन्हें बातों में उलझाया और कहा कि महाराजजी आप धार की बात मत कीजिए और ओंकारेश्वर दर्शन कर आइए। सभी महाराजजी को मीठी-मीठी बातों से उलझाते रहे।  करीब 20 मिनट की गेट पर खड़े-खड़े हुए वे उन्हें समझाते रहे। इस बीच महाराजश्री ने थोड़ा भड़कते हुए यह भी कहा कि क्या आप इस तरह किसी मौलवी को रोक सकते हो और अंतत: महाराजश्री ने ओंकारेश्वर जाने के लिए हामी भर दी।
बार-बार पलटे महाराज
इस बीच सीएसपी द्विवेदी ने उनकी गाड़ी में क्राइम ब्रांच के ड्राइवर को बिठवा दिया। जब वाहन नवग्रह जिनालय के गेट पर पहुंचा तो वहां इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को देख महाराजश्री को नई ताकत मिली और वे वाहन से उतरकर पेड़ के नीचे बैठ कर धार जाने की जिद करने लगे। प्रशासन ने वहां से उन्हें आगे बढ़ाने के लिए अपनी बनावटी रजामंदी जताई। इसके बाद वाहन की ड्राइविंग सीट पर महाराजश्री की सेवा में लगे प्रतिपाल टोंग्या बैठ गए। पीछे-पीछे मंत्री हार्डिया, लालवानी और गुप्ता दूसरे वाहन में चल रहे थे। थोड़ा आगे बढ़कर नेता लापता हो गए। प्रशासन के अफसर जरूर पीछे-पीछे थे। नावदा पंथ के पास महाराजश्री वाहन से उतरकर फिर पेड़ के नीचे बैठ गए। इसके बाद फिर महाराजश्री को प्रशासन ने छला और जलूद के रेस्ट हाउस में ले जाकर उन्हें दिनभर रोके रखा। इस बीच धार में नमाज हो गई। ताज्जुव की बात तो ये थी कि सरकार के जिन नुमाइंदों को महाराजश्री अपना समझ रहे थे वे ही बड़ी सफाई से प्रशासन के साथ मिलकर महाराज को छल रहे थे।
संघ पदाधिकारी को किया बंद, नेता रहे चुप
एक और आश्चर्य की बात यह रही कि मंत्री की मौजूदगी में जब संघ के पदाधिकारी संदीप अग्रवाल ने महाराजश्री के पक्ष में बात रखनी चाही तो उन्हें फार्म हाउस के कमरे में नजरबंद कर दिया गया।
शंकराचार्य पद पर भी उठे सवाल
कई लोगों ने शंकराचार्य के पद और उनकी गरिमा पर भी सवाल उठाए हैं। शांकर परंपरा के जानकार ने बताया कि आद्य शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की थी। इनके लिए नियम और दिशादर्शन आद्य शंकराचार्य की पुस्तक शंकर दिग्विजय, शंकर मठ विमर्त और मठ आमनाएं अनुशासनम् में उल्लेखित हैं। इनके मुताबिक चार मठ हैं- पूर्व में जगन्नाथपुरी में गोवर्धन मठ, पश्चिम में द्वारका में शारदा मठ, दक्षिण में शृंगेरी और उत्तर में बद्रीनाथ में ज्योतिष मठ। फिलहाल इन चार मठों पर तीन शंकराचार्य पीठाधीश्वर हैं। इनके तहत दो पीठों शारदा और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदजी और शृंंगेरी के शंकराचार्य स्वामी भारतीतीर्थ हैं। जानकारों का कहना है कि बाद में बनाई किसी भी पीठ के नाम पर खुद को शंकराचार्य लिखने वाले साधु आद्य शंकराचार्य द्वारा स्थापित व्यवस्था और परंपरा के नहीं माने जा सकते हैं। उनका खुद को शंकराचार्य लिखना छलपूर्ण है। बताया तो यह भी जाता है कि देश में 50 से ज्यादा फर्जी शंकराचार्य घूम रहे हैं।

Friday, January 18, 2013


जीवन मंत्र : सुखी रहना है तो दिखावा छोड़ें


गिरीशानंदजी महाराज
(प्रभारी, शंकराचार्य मठ इंदौर)

इंदौर। जीवन संग्राम से जूझने की कला वेद-शाों में ऋषि-मुनियों ने बताई है। व्यक्ति को सुखी जीवन जीने की कला भगवान ने भी अलग-अलग अवतार लेकर अपनी लीला के माध्यम से सिखाई है। राम अवतार में भगवान राम ने मर्यादा सिखाई और कृष्ण अवतार में कर्म करना सिखाया है। सीधा मतलब यह है कि यदि मर्यादा में रहकर कोई भी कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित प्राप्त होती है लेकिन दुर्भाग्यवश आज भौतिक चकाचौंध के कारण लोग अपनी संस्कृति को भूलने लगे हैं। पाश्चात्य चरित्रों में विशेष उत्सुक हैं। परिणास्वरूप यह उत्सुकता एक दिन युवा वर्ग के सामने प्रश्नवाचक चिह्न बनकर खड़ी हो जाएगी।
शिक्षित भारतीय नारी समाज में परिवर्तन चाहती है परंतु वे सीता, सावित्री, अनुसूईया  के आदर्श चरित्रों को छोड़कर विदेशी चरित्रों में विशेष उत्सुक दिखाई देती है। इसके कारण आए दिन उनका ही नुकसान हो रहा है। फूल नि:संदेह पत्थर से कमजोर होता है, परंतु मन को आकर्षित करता है। इसी प्रकार भारतीय नारी की सहजता उसका आभूषण है। कई बार आधी-अधूरी, अधकचरी विवेकहीन मानसिकता से ग्रसित नारी अपने उस अस्तित्व को समाप्त कर देती है, जिसके कारण वह हृदय में वास करती है। भारतीय संस्कृति में नारी को पुरुष में समान नहीं बल्कि श्रेष्ठ दर्जा दिया गया है, दुर्गा के रूप में मंदिर में पूजा जाता है। भगवान शंकर ने अद्र्धनारीश्वर में अपना स्वरूप देकर नारी को श्रेष्ठ दर्जा दिया है। देवी सीता की रक्षा के लिए भगवान राम ने रावण से युद्ध किया।
राधा का प्रेम सात्विक था और वह सांसारिक रूप से पूर्णत: विरक्त थी। इसलिए श्रीकृष्ण के साथ उसकी मंदिर में पूजा होती है। शूर्पणखा वासना की प्रतिमूर्ति थी, इसलिए उसके नाक-कान काटे गए। प्रेम में सुगंध होती है और वासना में दुर्गंध। वह नारी अब कम ही दिखाई देती हैं जो अपने बालकों में आदर्श चरित्रों का निर्माण करती है। वह नारी अब कहां है जो देश, परिवार और समाज के लिए, अपनी खुशियों के लिए बलि चढ़ा देती थी और त्याग की मूर्ति कहलाती थी। लोग तभी तो उसे देवी रूप में मानते थे। आज पाश्चात्य नारी भावुक प्रेम के लिए तरस रही है, क्योंकि वह प्रेम की नहीं वासना की मूर्ति बनकर रह गई है। आज आधे-अधूरे अंग प्रदर्शन वाले व पहनकर नारी सीता या राधा नहीं बल्कि शूर्पणखा के रूप में समाज- के सामने आती है, इसीलिए उसके शोषण की भय बना रहता है। परिणामस्वरूप समूचे आदर्श ,समाज को उनकी यह दशा देखकर पीड़ा होती है, पर यह समाज आधुनिकता के आगे लाचार दिखाई देता है। नकल के चक्कर में अकल को भूलने वाले लोग अपने देश की संस्कृति, नियमों को तोड़कर स्वयं दु:ख के सागर में गोते लगा रहेे हैं और समूचे समाज को भी दु:खी करते हैं। धैर्य और संतोष जीवन जीने की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि व्यक्ति धैर्य और संतोष रखे तो उसका जीवन निश्चित ही सुखी और सुरक्षित होगा। किसी ने सच ही कहा है-
देख पराई चूपड़ी, मत ललताओ जी।
रुखा-सूखा खाय के, ठंडा पानी पी।।


दूसरे को देखकर हमें लालच नहीं करना चाहिए। हमें जो भी मिला है उसी में संतोष कर गुजारा करना चाहिए। आज के दौर में लोग दूसरों की देखादेखी कर्ज लेकर मकान बनाते हैं, कार लेते हैं और दु:खी हो जाते हैं। दिखावे से जीवन में कष्ट ही कष्ट आते हैं। कई लोग बच्चों और परिवार पर ध्यान नहीं देते और शराब और अन्य नशों में डूबे रहते हैं, जिससे उनका परिवार दु:खी रहता है।
पुरुषों को चाहिए कि वे नारी का सम्मान करें। यदि पराई ी को देखकर अपने मन में बुरी भावना लाता है तो उस ी के मन में बैठा र्ईश्वर श्राप देता है। यदि वह उसे सम्मान से देवी रूप में देखता है तो उसके अंदर बैठा ईश्वर उसे आशीर्वाद देता है। यदि हम नारी से सम्मान चाहते हैं हमें भी उसके सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।

Monday, January 14, 2013

राधे मां के विवाद को शांत करने की कोशिश
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि मेले में किसी नए शंकराचार्य को नहीं बसने दिया जाएगा। जूना अखाड़े के सचिव श्रीमहंत हरिगिरि ने राधे मां को लेकर चल रहे विवाद को शांत करने की कोशिश की। उनका कहना है कि जूना के महामंडलेश्वरों की सूची में राधे मां का नाम नहीं शामिल किया गया है। उनके नाम से किसी भूमि का आवंटन भी नहीं है। वह बतौर महामंडलेश्वर मेले में शामिल नहीं होंगी। अलबत्ता सामान्य श्रद्धालु की तरह मेले में आएं तो उनका विरोध भी नहीं किया जाएगा।